Amit Yadav

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आपकी भरोसेमंद सवारी ❤
(हरियाणा रोडवेज) 🤔
रोशनी का कोई दरिया तो है, हां कहीं पे ज़रूर ❤
एक दिन रद्दी खरीदने वाले की साइकिल देखकर मुझे तुम्हारी उस 24 इन्छी साइकिल का वो आवाज़ करता 'चैन स्पॉकेट' याद आ गया। बिन मतलब के आवाज़ करता था। जाने कितनी बातों का मतलब हम खुद से निकाल लेते थे। जो उस खटखटाते हुए चैन स्पॉकेट की आवाज़ में सुनाई नहीं देती थी। याद है एक दिन तुमने कहा था कि तुम कल स्कूल नहीं आओगी और मुझे लगा कि तुमने कहा है कि तुम कल स्कूल थोड़ा लेट आओगी। फिर क्या था मैं अगले दिन थोडा लेट पहुंचा, वहां जाकर देखा तो तुम थी ही नहीं मुझे लगा कि कोई प्रॉब्लम रही होगी। मुझे थोड़ा डर भी लग रहा था। फिर जब तुम अगले दिन मिली थीं तब तुमने समझाया। दरअसल वो चैन स्पॉकेट की वजह से गलत फहमी हो गई थी! मुझे उस समय हँसी आई थी लेकिन फिर उस पर गुस्सा भी बहुत आया था। लेकिन क्या करता वो वेचारा गूंगा चैन स्पॉकेट (छोटी सी कहानी ~ चैन स्पॉकेट) ❤ to be continue #Forunknown
Support #RCB in this #ipl 
#playbold #ipl17 #ipl2017 #PlayBold
@virat.kohli @yuzi_chahal23 @chrisgayle333 @abdevilliers17
कौन कहता ये केवल झरने हैं, ये तो उस अस्तित्व में विश्वास बनाये रखने की निशानी हैं जिसमें कहते हैं की दुर्लभ परिस्थितियों में मिलन नहीं हो सकता! कभी इनसे सीखो, कहाँ से आते हैं किसी को बड़ी मुश्किल से पता होता है लेकिन कहाँ जाना है? कैसे जाना है? और किधर जाना है? सब खुद ही तय करते हैं। फिर हम क्यों नहीं? उस दिन याद है तुमने साइकिल की फ्राइवेल खराब होने का बहाने करके मेरे साथ पैदल स्कूल गईं थी! 15 मिनट के रस्ते को 1 घंटे से ज्यादा समय लगा था। उस बीच बहुत कुछ न चाहते हुए भी घटा था। ठीक इन झरनों की तरह! लेकिन जैसे ये कभी गलत रास्ता पकड़ कर बहुत समय ले लेते हैं मंज़िल तक पहुचने में वैसे ही हमने किया था शायद? हाँ ये अमर हैं हम नहीं ! To be continue 
#Forunknown
वो खुशबू बहुत प्यारी थी। बिलकुल वही वाली जब तुम मेरे घर के आगे से अद्धा पैडल मार कर साइकिल चलाती हुई स्कूल के लिए गुजरती थी। और फिर मैं इतनी जल्दी में खाना खाता था कि मम्मी को मेरे टिफ़िन में ज्यादा खाना रखना पड़ता था। शायद वो समझ गईं थी कि मैं जल्दी में कम खा रहा हूँ! फिर तुम गांव को सड़क से जोड़ते हुए उस चौराहे पर मिलती थी जहाँ से मुसाफ़िर कम मानसिक बीमार लोग ज्यादा मिलते थे! हम दोनों हमेशा समय से पहले स्कूल पहुचते थे। तभी तो रोज़ झगड़ा होता था। हमने जल्दी पहुचकर वो अपना सारा 'समय' उस समय ख़त्म कर दिया था। इसलिए अब वो हमारे पास नहीं है। to be continue
#ForUnknown ❤
उस बर्फ से झुककर महबूब का हाल पूछती हैं ये टहनियां ❤🌳🌲
इन टहनियों से लिपटी हैं उस जन्नत के महबूब कि मीठी-मीठी बातें ❤❤
🌲🌳
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I take a lot of pride in being myself. I'm comfortable with who I am. ❤
मेरे हाथ में ये जो लिफाफा देख रही हो मिस @kaushiky_kashyap इसमें बड़ी ही प्यारी चीज़ थी/है लेकिन दुर्भाग्य तुम्हारा 😂😷