Wasi Zaidi

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15, Yemen Road, Yemen
| उम्र गुज़ार दी गयी | नक़्श फरियादी |

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Walter White and Jesse Pinkman
हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है 
वो हर इक बात पर कहना कि यूँ होता तो क्या होता
धुन्द्लिी परछाईयाँ और तेज़ रोशनी, कितना सही मिक्स्चर है | इन दोनों अजज़ाओं के बीच एक बड़ी खूबसूरत सी लाइन होती है, जी हम उसे दोस्ती कहते हैं |
वो लोग जो आपको आपकी उस परछाई में पहचान लेते हैं जिसको आप एक तेज़ रोशनी में छिपाने की कोशिश कर रहे हैं, ना सिर्फ़ वो आपको हक़ीक़ी तौर पर पहचान लेते हैं बल्कि आपको उस तारीक़ी से बाहर लाने के लिए खुद अपनी रोशनी का सूरज आपके दस्त पर रख देते हैं |
अब ऐसा सूर्यादान कौन ही कर सकता है, आपका तो पता नही मेरे पास हैं कुछ लोग जिनके सूरज और मेरी परछाई का चोली दामन का साथ है |

PC ~ @baeparvah
ज़रूरी नहीं के आँख से रौशनी ही निकले, आँख से नूर भी निकल सकता है |
अब बस सूरत ए हाल ये है के इन दोनों में कुछ फर्क है भी ?
"क्या ऐसों को बनाएगा हमारा इमाम जो ज़मीन पर जाकर फसाद बरपा करे ?"
"जो मैं जानता हूँ, वो तुम नहीं जानते" बड़ा मुश्किल है पहचान्ना, कौन अशराफुल मख़लूक़ात है | 
PC ~ @begairath 
PA ~ @baeparvah
एक तीर जो तरकश से निकल गया मेरा 
अब तो वो सीना ए यार फ़ना चाहता है |
#chakorlakeerein 
#FaizKiAinak
वो नक़्शे देखता रहा जिसके पास थी दुनिया 
हम नक़्श ए पा से दुनिया बनाते चले गए |
#Instagram #Himachal

PC ~ @begairath
तक़ल्लुफ़ की हदों को खुद गिराकर अब वो कहता है 
तेरा बेबाक सा लहजा मुझे अच्छा नहीं लगता |

PC~ @baeparvah
हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है 
वो हर इक बात पर कहना कि यूँ होता तो क्या होता |
#Ghalib 
PC ~ @baeparvah
When it hasn't been your day, your week, your month or even your year But
#illbethereforyou #centralperk
पत्थरों के सीने में रक़्स करती सांसें अब मेरी रगों की रवानी के राग पर नाचना चाहती हैं | 
और मेरे चेहरे पर वो हवा की ठंडी लहर जो इन इमारतों के गोशों पर उगे सब्ज़े को तरो ताज़ा कर देती है, अपनी बाहें फैलाये उन ख्वाबों के बाहर आने के इंतज़ार में है जो इन बंद आँखों के पीछे खुद को छुपाने की नाकाम सी कोशिश कर रहे हैं, पर वो नहीं जानते ये हवा की सर्द लहर है जो आँख से निकले ख्वाबों के रोग़न से भी उनकी तासीर को पहचान लेती है |
PC ~ @begairath
ए काश के उस बॉन्ड के हाथों बहता न यूँ रक्त सदा 
ए काश के उस बॉन्ड से मज़हब होता न कुछ ज़ब्त सदा 
ए काश न होती दुनिया में बंदूकों की गूँज कहीं ए काश के उस तस्वीर की जानिब बढ़ जाता एक दस्त सदा 
PC~ @baeparvah
वो जो हसे खुद की बेबाकियों पे तो शाद हमको भी हो जाना चाहिए 
क्रश उसका आये जो पास तो ए दोस्त हमको भी शर्माना चाहिए

PC~ @baeparvah